महेश गोस्वामी की रिपोर्ट 9839412404
उ0 प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण , लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय श्री मयंक कुमार जैन के आदेशानुसार तथा श्री अनुपम शौर्य , सिविल जज (सी ० डि ०) की अध्यक्षता में एवं सुश्री सुषमा प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व श्री कृष्ण प्रताप सिंह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा की उपस्थिति में 2 अक्टूबर 2021 से आगामी 14 नवंबर 2020 तक मनाये जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव के अनुसरण में विधिक सेवा व सहायता गतिविधियों को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जनपद गोण्डा के वृद्ध आश्रम में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त तहसील सदर में एक तथा तहसील तरबगंज में दो विधिक शिविर आयोजित किये गये। विधिक साक्षरता शिविर में श्री अनुपम शौर्य , सिविल जज (सी०डि०) द्वारा वृद्ध आश्रम , गोण्डा में निवास कर रहे परिष्ठ नागरिकों के विधिक अधिकार के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए यह बताया गया कि भारत एक ऐसा देश है, जहां वृद्धजनों के पैर छूकर उन्हें सम्मान दिया जाता है तथा भगवान के समतुल्य माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में वृद्धावस्था के चरण से गुजरना पड़ता है। परिवार में वृद्धजनों की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन परिवार एवं समाज दोनों के लिए कल्याणकारी होती है , परन्तु कुछ परिवार में आज भी बुजुर्गों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता है। भारत में वृद्धजनों के विधिक अधिकार के सम्बन्ध में संवैधानिक उपबन्धों पर विशिष्ट रूप से जानकारी देते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 पर विशेष बल देते हुए यह बताया गया कि यदि पर्याप्त साधनों वाला कोई व्यक्ति अपने पिता या माता का , जो अपना भरण - पोषण करने में असमर्थ है , भरण पोषण करने में उपेक्षा करता है या भरण पोषण करने से इन्कार करता है , तो प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट ऐसी उपेक्षा साबित हो जाने पर ऐसे व्यक्ति को अपने पिता या माता का भरण पोषण करने के लिए मासिक भत्ता देने के सम्बन्ध में निर्देश दे सकते हैं। सुश्री सुषमा प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तराधिकार एवं भरण पोषण अधिनियम,1956 की धारा 20 वृद्धजनों को अपने बच्चों से भरण - पोषण प्राप्त करने का प्रावधान करती है। धारा 23 में न्यायालय के द्वारा भरण पोषण की धनराशि निर्धारित करने के सम्बन्ध में उपबन्ध दिये गये है। वर्तमान में न केवल पुत्र बल्कि पुत्रियों पर भी अपने माता - पिता के भरण - पोषण का दायित्व दिया गया है। यहां तक कि न केवल नैसर्गिक माता - पिता बल्कि दत्तक माता - पिता भी भरण - पोषण प्राप्त कर सकते हैं। आगे यह भी बताया गया कि जो वृद्ध अपने उत्तराधिकारी या रिश्तेदार को उपहार स्वरूप या फिर उनका हक मानते हुए अपनी सम्पत्ति उन्हें अन्तरित कर देते हैं तत्पश्चात उन्हें भरण पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की प्राप्ति नहीं होती है , तो वह विधि अनुसार अपनी सम्पत्ति वापस प्राप्त कर सकते हैं और सम्पत्ति का अन्तरण रद्द करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय के विधि - व्यवस्था सरकारी नीतियों एवं निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की विस्तृत जानकारी दी गयी वृद्ध आश्रम , गोण्डा में प्रवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के आश्रय एवं भण्डार / पाक गृह का निरीक्षण कर साफ - सफाई हेतु आवश्यक निर्देश देते हुए कोविड -19 प्रोटोकाल का कड़ाई से अनुपालन करने हेतु बताया गया। सचिव श्री कृष्ण प्रताप सिंह द्वारा यह भी बताया गया कि आजादी का अमृत महोत्सव 2 अक्टूबर 2021 से आगामी 14 नवंबर 2021 तक मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत के संविधान में जनसामान्य के जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन रोकने के लिए मौलिक अधिकार दिया गया है , जिससे जनपद के समस्त जनमानस तक विधिक सेवा / सहायता गतिविधियों को जागरूक करना है। आजादी के अमृत महोत्सव के द्वितीय चरण के दौरान विधिक शिविर के माध्यम से एवं डोर टू डोर पम्पलेट वितरण कर जनसम्पर्क अभियान में आज लगभग 271 को कवर करते हुए 271000 लोगों को विधिक सेवा / सहायता गतिविधियों से जागरूक किया गया।
