जंधेड़ी (मवाना)। मवाना से लगभग चार किलोमीटर दक्षिण स्थित जंधेड़ी गांव ने एक बार फिर अपनी सामाजिक एकता, शिक्षा प्रेम और सामुदायिक चेतना की मिसाल पेश की है। गुर्जर समाज के विधूड़ी गोत्र बाहुल्य इस गांव में विभिन्न जाति एवं समुदायों के लोग वर्षों से आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ निवास करते हैं। गांव में वाल्मीकि, जाटव, कुम्हार, जुलाहा, ब्राह्मण, बनिया, नाई, धीवर, बढ़ई, लोहार सहित सभी वर्गों के लोग मिलजुलकर रहते हैं। जंधेड़ी की पहचान केवल सामाजिक समरसता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव शिक्षा और साहस के लिए भी क्षेत्रभर में प्रसिद्ध है। यहां के अनेक युवा देश-विदेश में उच्च पदों पर कार्यरत हैं और गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आज तक किसी बड़े राजनीतिक विवाद या मुकदमे की नौबत नहीं आई। छोटे-मोटे विवाद भी आपसी बैठकों और समझौते के माध्यम से सुलझा लिए जाते हैं।
गांव में लंबे समय से एक सार्वजनिक लाइब्रेरी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस कमी को अमेरिका से नौकरी करके लौटे समाजसेवी प्रवीण अधाना ने गांव के शिक्षित और समृद्ध लोगों के सहयोग से पूरा कर दिया। जनसहयोग से स्थापित यह लाइब्रेरी अब गांव के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए ज्ञान का नया केंद्र बनेगी।ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगी। लाइब्रेरी निर्माण अभियान से जुड़े सभी सहयोगियों और विशेष रूप से प्रवीण अधाना के प्रयासों की गांवभर में सराहना की जा रही है। ग्रामीणों ने इस कार्य को शिक्षा और सामाजिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए सभी सहयोगकर्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
