नियम को लेकर मचा घमासान।
शासन की दिखी हताशा.राष्ट्र के सवर्ण समाज शांतिपूर्ण आन्दोलन को दबाने की कोशिश।
सुभ दर्पण
संतोष कुमार शुक्ल.
मनकापुर गोंडा.यू .जी.सी नये नियम को लेकर जिस तरह भाई चारे का महौल खत्म व आरक्षण वाद का खेल प्रधान सेवक ने खेलकर राष्ट्र को दिखाया है ।उस नियम ने एक बहुत बड़ी क्रांति का संदेश देते हुए बहुत बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है । राष्ट्र के सभी सनातन धर्म के मानने वाले लोग गांव से लेकर शहर तक एक दूसरे के सुख .दुख में एक साथ खड़े होकर हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर चलने का कार्य करते हुए एकता का संदेश देने का कार्य हमेशा करते चले आयें है। जिसे कभी भूला नहीं जा सकता।अचानक प्रधान सेवक मोदी के दिमाग की भूत ने पुनः बत्ती जला दी । जिस नये नियम को लेकर आपस में लडाई करवा देने का कार्य कर दिखाया। आरक्षण व
हरिजन ऐक्ट फर्जी मुकदमें का दंश तो एक बिशेष समाज झेल ही रहा था। कि दूसरा आपस में सभी को उच्च शिक्षा के बिंदू पर यू.जी.सी नये नियम लाकर कर लड़ाई करने के लिए मजबूर कर दिया। क्यों ऐसे नियम की जरूरत पड गयी। हंसते हुए भारत को अपने ही घर मे आन्दोलन की जरूरत पड गयी । पूछता है भारत क्या यही विकसित राष्ट्र का माडल है। प्रधान सेवक जी आपस में सब लडें।क्रांति करने को मजबूर हों .आप विकसित राष्ट्र के मूल रास्ते से भटक चुकें है। राष्ट्र तो विकसित बनेगा यह पक्का है। लेकिन इसके कर्णधार आप नही समूचे राष्ट्र के प्रतिभावान बच्चों के हांथों में शुनिश्चित है । इसलिए समूचे राष्ट्र का यह सबसे बड़ा सवाल है। जिस पर स्पष्ट शब्दों से आपको जबाब मौन साधन में रहकर नहीं स्वच्छ मन से जबाब देना होगा।जिस तरह से कल
शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए जन्तर-मन्तर दिल्ली के मैदान में सवर्ण समाज को पहुचने से आप ने रोका वह भारत राष्ट्र के नैतिक अधिकारों का हनन है।समय अभी भी है। उच्च शिक्षा के मंदिर में जहां सभी जातियों के बच्चे अपने प्रतिभा को खोजने का कार्य करते हैं । उस उच्च शिक्षा मंदिर में तलवारें चलें इससे कभी विकसित राष्ट्र भारत नही हो सकता। अपितु आपस मे हो सकते है। खूनी संघर्ष. जिस बात को लेकर समूचा सवर्ण समाज आन्दोलन के लिए मजबूर हो चुका है । यह भी सत्य कि इस आन्दोलन को कोई रोक भी नहीं सकता। जब जब राष्ट्र में आन्दोलन हुआ एक नयी क्रांति ने जन्म लिया। आन्दोलन में किन.किन ने भाग लिया। इतिहास के पन्नों मे आज भी वर्णित है । इसलिए चुपी तोड़ें राष्ट्र को एक सुरक्षित वातावरण में समाहित करें
एक बड़ी क्रांति पर विचार करते हुए इस कहानी का अंत करे।विकसित राष्ट्र विकसित भारत बिना प्रतिभावान बच्चों के संभव नहीं।
राष्ट्र हित में।
