श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के वनस्पति विज्ञान एवं कृषि विज्ञान के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विश्व ओजोन दिवस पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर आर. के .पांडे ने कहा धरती पर जीवन के अस्तित्व के लिए ओजोन की परत का सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक है, ओजोन परत के क्षरण से हानिकारक किरणें पृथ्वी तक पहुंचती है जिनका हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है विगत 20 वर्षों में त्वचा कैंसर बहुत तेजी से बढ़ा है जिसका एक कारण ओजोन क्षरण भी है इसलिए हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए ही प्रगति के पथ पर विकास करना है वही वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रवण कुमार श्रीवास्तव ने ओजोन क्षरण के कारण एवं निवारण पर प्रकाश डाला ।कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रेखा शर्मा ने बताया क्लोरोफ्लोरोकार्बन जिसका उत्सर्जन एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर एवं अन्य ऐसे ही उपकरणों से होता है । क्लोरोफ्लोरोकार्बन जब वायुमंडल में जाता है तो क्लोरीन इससे अलग हो जाती है और स्ट्रेटोस्फीयर में उपस्थित ओजोन की परत तक पहुंच कर ओजोन का ऑक्सीकरण कर देती जिससे ओजोन ऑक्सीजन में बदल जाता है और एक क्लोरीन का मॉलिक्यूल एक लाख ओजोन के मॉलिक्यूल को तोड़ने में सक्षम होता है इसलिए हमें इसके विकल्प को ढूंढने की आवश्यकता है और इस दिशा में हमारे वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में कृषि विभाग के प्राध्यापक डॉ घनश्याम द्विवेदी, डॉ विनय कुमार पांडे, डॉ स्मिता सिंह ,डॉ धर्मेंद्र प्रताप सिंह एवं अवनीश कुमार मिश्रा का सहयोग सराहनीय रहा। अंत में छात्र छात्राओं ने प्रकृति के साथ संवेदनशील होने एवं पर्यावरण का संरक्षण करने का संकल्प लिया।
डॉ रेखा शर्मा
मीडिया सह प्रभारी
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के विज्ञान संकाय में मनाया गया विश्व ओजोन दिवस
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के वनस्पति विज्ञान एवं कृषि विज्ञान के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विश्व ओजोन दिवस पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर आर. के .पांडे ने कहा धरती पर जीवन के अस्तित्व के लिए ओजोन की परत का सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक है, ओजोन परत के क्षरण से हानिकारक किरणें पृथ्वी तक पहुंचती है जिनका हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है विगत 20 वर्षों में त्वचा कैंसर बहुत तेजी से बढ़ा है जिसका एक कारण ओजोन क्षरण भी है इसलिए हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए ही प्रगति के पथ पर विकास करना है वही वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रवण कुमार श्रीवास्तव ने ओजोन क्षरण के कारण एवं निवारण पर प्रकाश डाला ।कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रेखा शर्मा ने बताया क्लोरोफ्लोरोकार्बन जिसका उत्सर्जन एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर एवं अन्य ऐसे ही उपकरणों से होता है । क्लोरोफ्लोरोकार्बन जब वायुमंडल में जाता है तो क्लोरीन इससे अलग हो जाती है और स्ट्रेटोस्फीयर में उपस्थित ओजोन की परत तक पहुंच कर ओजोन का ऑक्सीकरण कर देती जिससे ओजोन ऑक्सीजन में बदल जाता है और एक क्लोरीन का मॉलिक्यूल एक लाख ओजोन के मॉलिक्यूल को तोड़ने में सक्षम होता है इसलिए हमें इसके विकल्प को ढूंढने की आवश्यकता है और इस दिशा में हमारे वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में कृषि विभाग के प्राध्यापक डॉ घनश्याम द्विवेदी, डॉ विनय कुमार पांडे, डॉ स्मिता सिंह ,डॉ धर्मेंद्र प्रताप सिंह एवं अवनीश कुमार मिश्रा का सहयोग सराहनीय रहा। अंत में छात्र छात्राओं ने प्रकृति के साथ संवेदनशील होने एवं पर्यावरण का संरक्षण करने का संकल्प लिया।
डॉ रेखा शर्मा
सह प्रभारी ,मीडिया
श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज गोंडा
