संतोष कुमार शुक्ल की रिपोर्ट।
बहिनी साहेब शिवाली सिंह एवं कु. विक्रम सिंह के पोस्टर को बीच से फाड़ना केवल एक पोस्टर को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और सार्वजनिक सम्मान के विरुद्ध किया गया कृत्य है।*
जो लोग विरोध की राजनीति में इस स्तर तक गिरकर पोस्टर फाड़ने का सहारा लेते हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि विचारों का विरोध तर्क और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाता है, तोड़फोड़ और पोस्टर फाड़कर नहीं।
*इस प्रकार की हरकत से किसी की लोकप्रियता या सम्मान कम नहीं होता, बल्कि ऐसा करने वालों की मानसिकता और असहिष्णुता स्वयं उजागर होती है।*
विरोध करना आपका अधिकार है, लेकिन किसी के सम्मान और सार्वजनिक प्रचार सामग्री को नुकसान पहुँचाना स्वीकार्य नहीं है। भविष्य में ऐसी हरकतों से बचें और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करें। बहन शिवाली सिंह के समर्थको मे गहरा आक्रोश ।
*सम्मान रहेगा तो संवाद रहेगा,*
*लोकतंत्र रहेगा तो विरोध भी रहेगा।*
