संतोष कुमार शुक्ल की खास रिपोर्ट
गोंडा मनकापुर. विजय बहादुर पांडे मानवता की मिशाल पेश करते हुए स्मरणीय कार्य किया।
जो समाज मे असहायों की मदद करने की प्रेरणा देता है।गौरतलब हो कि बिजय बहादुर पांडे की अंबेडकर चौराहे के निकट एक रजाई गद्दा की बड़े पैमाने की दुकान है।जो दुकान करने के साथ .साथ समाजिक एवं मानवता के कार्य करने मे विजय बहादुर पांडे की प्रबल इच्छा हमेशा बनी रहती है।दिलचस्प बात यह है कि एक मैकू लाल चमार परशुरामपुर बहराइच जिले उम्र तीस बर्ष गोंडा आकर अपना जीवन यापन करने लगा था।वह भी पांडे जी के दुकान के कुछ ही दूरी पर रहा करता था। मैकू चमार की पत्नी भी विक्लांग पायी जाती है।किसी तरह मैकू चमार की पत्नी भिक्षा मांग कर अपने बिक्लांग बच्चे व पति का पेट भरने का प्रति दिन कार्य किया करती थी।जिस मैकू चमार को सांस की बीमारी काफी दिन से चल रही थी।जिसका देहांत हो गया।अब उसकी अंतिम संस्कार की सबसे बड़ी दिक्कत सामने आ खड़ी हुई।क्योकिं पत्नी एवं बच्चे दोनो बिक्लांग थे।समस्या का बोझ आ खड़ा हुआ। परन्तु राम दूत हनुमान जी का रोल विजय बहादुर पांडे ने अदा करते हुए मानवता की मिशाल अपने मित्रो के साथ मिलकर पेश करते हुए.।समाज के बीच एक मानवता की मिशाल पेश की जिन्होने स्वंम कंधा लगाकर उसके अंतिम संस्कार कार्य को संपन्न कराने का कार्य किया।जो समूचे राष्ट्र के लिए जाति पाति के अंतराल को खत्म करने के लिए एक प्रेरणा सोत्र भी है।जो ऐतिहासिक।
