अक्षय तृतीया जैसे संवेदनशील अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए अपराजिता सामाजिक समिति ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर सतर्कता दिवस मनाया। इस अवसर पर बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह रणनीति बनाई गई कि जिले में अक्षय तृतीया के दिन एक भी बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अपराजिता सामाजिक समिति लंबे समय से पंचायतों, स्कूलों, धर्मगुरुओं और समुदाय के साथ मिलकर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही है। संगठन द्वारा अब तक हजारों लोगों को बाल विवाह न करने और इसकी सूचना देने की शपथ दिलाई जा चुकी है। यह संस्था राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी है, जो देश के 450 से अधिक जिलों में अभियान चलाकर अब तक 5 लाख से ज्यादा बाल विवाह रोकने में सफल रहा है।
अपराजिता की निदेशक किरण बैस ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि प्रशासन और नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों से ऐसी घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करना अभी भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के तहत नाबालिगों की शादी कराना दंडनीय अपराध है, जिसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
बैठक में AHTU से थाना प्रभारी लाल बिहारी व उनकी टीम, प्रोटेक्शन ऑफिसर चन्द्रमोहन वर्मा, वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर चेतना सिंह, DHEW की टीम, चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम तथा अपराजिता सामाजिक समिति के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया और विशेष निगरानी एवं त्वरित हस्तक्षेप की रणनीति पर सहमति जताई।
