गोंडा, 29 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। स्वर्गीय मेवालाल जूनियर हाई स्कूल, सिहागांव, मोतीगंज, गोंडा, सहित कई अन्य स्कूलों में माध्यमिक शिक्षा परिषद की मान्यता से अधिक कक्षाओं का अवैध संचालन धड़ल्ले से जारी है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) द्वारा 21 अगस्त 2025 को किए गए स्थलीय निरीक्षण में इन स्कूलों में अनधिकृत कक्षाएं संचालित पाई गईं। इसके बावजूद, जांच आख्या में दावा किया गया कि नोटिस जारी कर इन कक्षाओं को बंद कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई केवल कागजी है और वास्तविकता में अवैध कक्षाएं अब भी चल रही हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक प्रार्थी ने संदर्भ संख्या 40018325025917 के तहत जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा, जिसमें स्वर्गीय मेवालाल जूनियर हाई स्कूल और अन्य स्कूलों में अवैध कक्षाओं के संचालन की शिकायत की गई। प्रार्थना पत्र के आधार पर, माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने परि०-9/मान्यता/437 दिनांक 05/08/2025 के आदेश के तहत मान्यता से अधिक कक्षाओं को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया। इसके बाद, डीआईओएस ने 21 अगस्त 2025 को स्कूलों का निरीक्षण किया और जांच आख्या में पुष्टि की कि कई स्कूलों में मान्यता से अधिक कक्षाएं संचालित हो रही थीं। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नोटिस जारी कर इन कक्षाओं को बंद कर दिया गया है।
हालांकि, स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है। स्वर्गीय मेवालाल जूनियर हाई स्कूल सहित कई अन्य स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं बिना मान्यता के चल रही हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 18 का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। गोंडा जिले में पहले भी बाराबंकी जैसे मामलों में अवैध कक्षाओं के संचालन की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जहां 98 स्कूलों में अनधिकृत कक्षाएं चल रही थीं।[](https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/barabanki/illegal-classes-from-9th-to-12th-running-in-98-more-schools-barabanki-news-c-315-1-brp1007-123327-2024-08-28)
जिलाधिकारी और डीआईओएस के आदेशों के बावजूद इन स्कूलों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से अभिभावकों और स्थानीय लोगों में रोष है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते ये स्कूल बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि दोषी स्कूल संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। इस मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से ठोस कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है, ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोका जा सके।
