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बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की क्रूर हत्या: बढ़ती अशांति और अल्पसंख्यक चिंता

लखनऊ: बांग्लादेश में हालिया हिंसा की लपटों के बीच एक और दर्दनाक घटना ने दुनिया का ध्यान खींचा है। मयमंसिंह जिले के भालुका इलाके में 25-27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास (Dipu Chandra Das) की कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना 16-18 दिसंबर 2025 की रात हुई, जब फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू को उनके सहकर्मियों ने जबरन इस्तीफा लिखवाकर बाहर निकाला और उग्र भीड़ के हवाले कर दिया।भीड़ ने दीपू को बुरी तरह पीटा, गले में रस्सी का फंदा डालकर लटकाया और फिर शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश-विदेश में आक्रोश फैल गया। जांच में ईशनिंदा के आरोपों की कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई, बल्कि यह फैक्ट्री विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने अब तक 10-12 लोगों को गिरफ्तार किया है।यह हिंसा शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की अशांति का हिस्सा है। हादी, 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता, 12 दिसंबर को गोली लगने से घायल हुए थे और 18 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में प्रदर्शन भड़क उठे, जिसमें मीडिया हाउसों पर हमले और तोड़फोड़ हुई।भारतीय जन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार और प्रशासन सो रहा था, जबकि हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं। सिंह ने मांग की कि हत्यारों को खुले मैदान में फांसी दी जाए और दीपू के परिवार को 5 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाए।बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) ने घटना की निंदा की है और कहा कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा की कोई जगह नहीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकी सांसद और भारतीय नेता प्रियंका गांधी, पवन कल्याण आदि ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है।यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों की एक कड़ी है, जिससे फरवरी 2026 के चुनावों से पहले राजनीतिक अस्थिरता गहरा गई है।

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