गांधी पार्क में चल रही नियमित योग कक्षा में रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया।
योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया इस विशेष अवसर पर बच्चों ने योग के माध्यम से प्रेम, एकता और भारतीय संस्कृति के महत्व को महसूस किया।
सभी बच्चों ने पारंपरिक राखियाँ बांधकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और "रक्षा सूत्र" के महत्व को समझा।
योग प्रशिक्षक आशीष गुप्ता ने बताया रक्षाबंधन का इतिहास बहुत प्राचीन और समृद्ध है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है। इसके पीछे कई पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
जिसमें एक कथा भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी की है।
महाभारत के अनुसार, जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को मारा, तो उनके हाथ में चोट लग गई। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनके हाथ पर बाँध दिया। भावनात्मक रूप से प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने वचन दिया कि समय आने पर वे उसकी रक्षा करेंगे। यही वादा "रक्षा का बंधन" बन गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को भारतीय पर्वों से जोड़ते हुए योग के माध्यम से संस्कार और अनुशासन का संदेश देना।
कार्यक्रम में आशीष गुप्ता,रिषित, शिवा, शौर्य, श्रीम, पंछी, बिट्टू, अपर्णा, भार्गवी, सात्विक, काशवी, गौरी, खुशी, आदर्श, भाव्या, शिवांश, साक्षी, अक्षरा, कृष्णा, काव्या, शगुन, उत्कर्ष, नक्श, सिया, शांभवी, रुद्रा, अर्जुन, प्रज्वल आदि रहे।
