गोंडा जनपद के कटरा बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत बनगांव निवासी अरुण पांडेय ने अपने हल्का लेखपाल पर भ्रष्टाचार और दबंगई का गंभीर आरोप लगाया है। अरुण पांडेय का कहना है कि हल्का लेखपाल राजेश यादव ने चिट्ठा कुर्रा बनाने के नाम पर उनसे खुले तौर पर रिश्वत मांगी और रकम देने के बावजूद काम न कर के उन्हें धमकाया भी। पीड़ित ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिलाधिकारी गोंडा से की है और निष्पक्ष जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अरुण पांडेय ने जिला अधिकारी गोण्डा को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनके परिवार की जमीन का चिट्ठा कुर्रा बनवाने के लिए वे कई महीनों से हल्का लेखपाल के पास चक्कर काट रहे थे। पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान लेखपाल राजेश यादव ने उनसे “खर्चा-पानी” के नाम पर रिश्वत मांगी। पीड़ित के अनुसार, करीब छह माह पहले उन्होंने लेखपाल को दो हजार रुपये नकद दिए थे ताकि काम जल्दी हो जाए। लेकिन बाद में लेखपाल ने यह रकम “कम” बताई और अपने मुंशी जवाहर चौरसिया (निवासी गब्जी पुरवा, मौजा सरैंया) को भी दो हजार रुपये और देने को कहा। अरुण पांडेय ने आरोप लगाया कि उन्होंने लेखपाल के कहने पर उसके मुंशी को भी पैसे दिए।लेकिन पीड़ित के मुताबिक, इतने पैसे देने के बाद भी उनका काम नहीं हुआ। चिट्ठा कुर्रा आज तक नहीं बना। जब उन्होंने लेखपाल से कई बार फोन पर संपर्क किया तो लेखपाल ने फोन उठाना ही बंद कर दिया। अरुण पांडेय का दावा है कि जब उन्होंने किसी अन्य नंबर से लेखपाल को फोन किया तो लेखपाल ने फोन पर गाली-गलौज करते हुए उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इतना ही नहीं, पीड़ित के अनुसार लेखपाल ने कथित तौर पर कहा कि “मेरी नेतागिरी के दम पर तुम्हें बर्बाद कर दूंगा।
पीड़ित ने जिलाधिकारी को दिए गये प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि रिश्वत देने के वक्त का वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद है। उन्होंने कहा कि वे किसी दबाव में झूठा आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि उनके पास ठोस प्रमाण हैं। अरुण पांडेय ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित लेखपाल एवं उसके सहयोगी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस प्रकरण के उजागर होने के बाद क्षेत्र में हलचल मची हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के कई कर्मचारी इस तरह की मनमानी और अवैध वसूली करते हैं, लेकिन लोग अक्सर डर के कारण शिकायत नहीं कर पाते। पीड़ित का कहना है कि वह गरीब किसान हैं और मामूली जमीन के कागजात सही कराने के लिए उन्हें महीनों से दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि भ्रष्टाचार और धमकी की इस घटना को गंभीरता से लिया जाए और गरीब किसानों के साथ न्याय हो। हालांकि इस मामले में संबंधित लेखपाल का पक्ष नहीं मिल सका है। शिकायत की प्रति जिलाधिकारी कार्यालय में जमा हो चुकी है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जिलाधिकारी ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अगर आरोप सही पाए गए तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
