कटरा बाजार गोंडा
विकास की तमाम घोषणाओं और योजनाओं के बीच जनपद गोंडा के ग्राम पंचायत कोटिया मदारा के मजरा होलापुरवा में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पंचायत स्तर पर हो रहे विकास कार्यों में धार्मिक भेदभाव का खुला आरोप लग रहा है। स्थानीय निवासी तपन कुमार सिंह ने जनसुनवाई पोर्टल पर एक के बाद एक तीन शिकायतें दर्ज कराकर यह बताया है कि सामुदायिक शौचालय से जीवनलाल के घर तक इंटरलॉकिंग मार्ग निर्माण कार्य को जानबूझकर पंचायत की कार्य योजना से हटा दिया गया, जबकि यह कार्य पूर्व में योजनाओं में दर्ज था।प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कोटिया मदारा के होलापुरवा मजरे के निवासी तपन कुमार सिंह ने ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय से जीवनलाल के घर तक इंटरलॉकिंग मार्ग बनवाने की मांग की थी। उन्होंने दिनांक 22 जनवरी, 17 फरवरी व 10 मार्च 2025 को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत के माध्यम से अपनी समस्या रखी। उनके अनुसार यह कार्य वर्ष 2022-23 में योजना क्रमांक 103 और 2023-24 में क्रमांक 18 पर स्वीकृत था, लेकिन धार्मिक भेदभाव के चलते ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा इसे 2024-25 की कार्य योजना से हटा दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस भेदभाव की पुष्टि खुद पंचायत सचिव रंजीत वर्मा ने IGRS रिपोर्ट में कर दी है। इसकी प्रमाणित प्रति शिकायतकर्ता ने मुख्य विकास अधिकारी को प्रेषित की है, जिसमें स्पष्ट रूप से भेदभाव का संकेत दिया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा खंड विकास अधिकारी, कटरा बाजार से भी संपर्क किया गया, जहां उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि ग्राम प्रधान की सहमति के बिना कोई भी कार्य करवाना संभव नहीं है। यानी एक निर्वाचित प्रतिनिधि की इच्छा के बिना जनहित के कार्य ठप पड़े हैं।सबसे गंभीर आरोप तब सामने आया जब ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान मोहम्मद आरिफ से संपर्क किया तो ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान ने साफ तौर पर कहा कि अगर होलापुरवा के निवासी अगली पंचायत चुनाव में उन्हें ही वोट देने की "मंदिर पर कसम" खाते हैं, तभी इंटरलॉकिंग सड़क बनाई जाएगी वरना नहीं बनवाई जाएगी। यह एक सीधा लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है, जहाँ एक जनप्रतिनिधि वोट की सौदेबाजी कर रहा है।शिकायतकर्ता ने बताया कि इस मजरे में कैंसर पीड़ित मरीज हैं, जिन्हें अस्पताल लाने-ले जाने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुजरना, स्ट्रेचर पर मरीज को ढोना और एम्बुलेंस तक पहुंचाना एक मुश्किल कार्य बन गया है अब ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी महोदया,गोंडा से इस गंभीर स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासनिक स्तर से न्याय नहीं मिला, तो वे जिला मुख्यालय तक धरना देने को मजबूर होंगे।यह मामला न केवल एक ग्राम पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार और भेदभाव का आइना है, बल्कि पूरे तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। अगर वोट के बदले विकास की शर्तें रखी जा रही हैं, तो यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। प्रशासन को चाहिए कि वह त्वरित कार्रवाई कर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
