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आप सभी देशवासियों को शिक्षा की देवी भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, दलितों, वंचितों,महिलाओं के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष करने वाली क्रांति ज्योति माता सावित्रीबाई फुले जी की 193वीं जन्म जयंती (03 जनवरी) पर हार्दिक मंगलकामनाएं और सादर शत- शत नमन।

*आप सभी देशवासियों को शिक्षा की देवी भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, दलितों, वंचितों,महिलाओं के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष करने वाली क्रांति ज्योति माता सावित्रीबाई फुले जी की 193वीं जन्म जयंती (03 जनवरी) पर हार्दिक मंगलकामनाएं और सादर शत- शत नमन।

"सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका (India’s First Women Teacher) थीं। सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का कार्य किया।
सावित्री बाई फुले जी का जन्म 03 जनवरी सन् 1831 को महाराष्ट्र स्थित सातारा के नाय गाँव में हुआ था। महान समाज सुधारक,देश की पहली महिला विद्यालय की संस्थापक सावित्रीबाई सावित्रीबाई फुले ने महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर भारत की पहली महिला विद्यालय 1 जनवरी 1848 ई में पुणे के भीड़बाडा में खोला था। उससे पहले सावित्रीबाई फुले का अध्यापक प्रशिक्षण अहमदनगर के एक मिशनरी स्कूल में हुआ था। वहीं इस तथ्य को भी रेखांकित किया जाना जरूरी है कि वहां दूसरी छात्रा फातिमा शेख थीं। प्रथम मुख्य अध्यापिका सावित्रीबाई फुले व दूसरी अध्यापिका फातिमा शेख व सगुणा बाई थीं।
सावित्रीबाई फूले पूरे देश की महानायिका हैं उन्होंने हर जाति और धर्म के लिये काम किया। जब देश में जाति प्रथा और जातीय भेदभाव चरम पर था उस समय जब सावित्रीबाई फुले जी महिलाओं को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर,विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई फूले एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं वे स्कूल जाती थीं, तो लोग पत्थर मारते थे और उन पर गंदगी फेंक देते थे। आज से 169 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था लेकिन ऐसी स्थिति में देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फूले जी ने कितनी सामाजिक मुश्किलों से खोला गया होगा देश में एक अकेला बालिका विद्यालय।इसी से उनकी वीरता और महानता का अंदाजा लगाया जा सकता है।ऐसी महानायिका सावित्रीबाई फुले को नमन। शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

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