हिंदी भारत की पहचान है: घनश्याम पांडेय
गोंडा। अधिवक्ता परिषद गोंडा इकाई द्वारा हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत 'भारतीय न्याय व्यवस्था में हिंदी की भूमिका' विषयक संगोष्ठी जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह जी के आवास पर आयोजित की गई।
मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखते हुए अधिवक्ता परिषद के संरक्षक घनश्याम पांडेय ने कहा कि हिंदी सिर्फ भाषा ही नहीं बल्कि भारत की पहचान है। यह हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में हिंदी की भूमिका इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि ये आम जनता से सीधे जुड़ी हुई भाषा है। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता परिषद के जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। अपनी मातृभाषा में हम अपने विचारों को ज्यादा प्रभावी रूप से व्यक्त कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी हिंदी बोलने वालों की जिम्मेदारी है कि हम हिंदी को मजबूत करने के लिए संकल्पित हों। संचालन करते हुए महामंत्री धनलाल तिवारी ने कहा कि अक्सर लोग हिंदी बोलने वालों को हेय दृष्टि से देखते हैं। उन्हें अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। हमारी हिंदी भाषा बहुत समृद्ध है और हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। संगोष्ठी में केपी सिंह, ओम प्रकाश शुक्ला, रामबाबू तिवारी, शुभम शुक्ला, विनोद यादव, शैलेंद्र मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
