मेरठ जिले तहसील मवाना में भू-माफियाओं विनोद गुप्ता की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। मोहल्ला कल्याण सिंह, गुड मंडी क्षेत्र में सरकारी तालाब की बहुमूल्य भूमि संख्या-1201 पर भू-माफिया विनोद गुप्ता और उसके पुत्रों अमर गुप्ता व इशान गुप्ता द्वारा गुंडागर्दी के बल पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है, और आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के सहारे यहां अलीशान मकान का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। स्थानीय निवासियों ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों को भेजी है, जिसमें तत्काल कब्जा मुक्ति और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।शिकायत के अनुसार, यह सरकारी भूमि मूल रूप से मरहूम महालशेख अब्दुल वहाब के नाम दर्ज थी, जिसे कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट मेरठ के आदेश पर नजूल भूमि घोषित कर दिया गया था। तालाब की यह बेशकीमती संपत्ति पर्यावरण और जल संरक्षण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन भू-माफियाओं ने अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर इसे हड़प लिया। विनोद गुप्ता पुत्र स्वर्गीय शांतिशरण गुप्ता, निवासी मोहल्ला कल्याण सिंह, निकट ठाकुर अमरपाल सिंह की कोठी, के नेतृत्व में उसके बेटे अमर और इशान ने जालसाजी कर नामांतरण करवाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये आरोपी बाहुबली किस्म के अपराधी हैं, जिनके खिलाफ थाना मवाना में पहले से ही गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। ये पेशेवर अपराधी सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बेचने का धंधा चला रहे हैं।यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार की 'एंटी भू-माफिया' मुहिम के बीच सामने आया है, जहां हाल ही में राजस्व परिषद ने सख्त नियम लागू किए हैं। आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद मनीषा त्रिघाटिया के निर्देशानुसार अब ऐसी शिकायतें सीधे एसडीएम स्तर पर भेजी जाएंगी और तीन चरणों में कार्रवाई होगी—सर्वे, नोटिस और बुलडोजर एक्शन। राज्य स्तर पर तालाबों और सरकारी भूमियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ विशेष अभियान चल रहा है, जिसमें बदायूं, जौनपुर जैसे जिलों में पहले ही कई कब्जे हटाए गए हैं। मेरठ में भी एंटी भू-माफिया टीम अलर्ट पर है, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठा।शिकायतकर्ता ने जिला मजिस्ट्रेट, एसएसपी और संबंधित राजस्व अधिकारियों से अपील की है कि तालाब को कब्जामुक्त कराया जाए, अवैध निर्माण रोका जाए और दोषियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (जालसाजी), 447 (अवैध कब्जा) समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज हो। उन्होंने कहा, "ये माफिया राजनीतिक संरक्षण के चलते बेखौफ हैं, लेकिन जनहित में तुरंत कार्रवाई जरूरी है।" यदि प्रशासन ने चुप्पी साधी तो स्थानीय लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।यह घटना भू-माफियाओं की बढ़ती साजिशों को उजागर करती है, जहां सरकारी संपत्तियां निजी हितों का शिकार हो रही हैं। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं आम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सर्वे और सैटेलाइट मैपिंग से ऐसी धांधली रोकी जा सकती है। फिलहाल, मेरठ प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है, जो लोकहित में मिसाल कायम कर सकती है।
