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बरामभरी सहकारी समिति पर खाद कालाबाज़ारी के आरोप, किसानों में रोष*

*बरामभरी सहकारी समिति पर खाद कालाबाज़ारी के आरोप, किसानों में रोष*

उतरौला (बलरामपुर)
तहसील उतरौला क्षेत्र में अन्नदाताओं की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। डीएम बलरामपुर के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सहकारी समितियां मनमानी और कालाबाज़ारी से बाज नहीं आ रही हैं। ताज़ा मामला बरामभरी सहकारी समिति का है, जहां सचिव पर बड़े पैमाने पर खाद की जमाखोरी और प्राइवेट दुकानदारों को आपूर्ति करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को समिति पर आई खाद की खेप का आधे से अधिक हिस्सा सचिव द्वारा प्राइवेट दुकानदारों के यहाँ भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि यह सब कालाबाज़ारी की नीयत से किया गया, ताकि किसानों को अधिक कीमत पर खाद खरीदने पर मजबूर किया जा सके। शेष बची हुई खाद की बोरियों का वितरण शुक्रवार को किसानों के खातों में किया गया, लेकिन संख्या अधिक होने और स्टॉक कम होने के कारण अधिकांश किसानों को निराश लौटना पड़ा।
समिति परिसर में सुबह से ही किसानों की लंबी लाइन लगी रही। कई किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें 250 रुपये प्रति बोरी की सरकारी दर के बजाय 500 रुपये तक में खाद खरीदने की पेशकश की गई। किसानों का कहना है कि यह सीधे-सीधे लूट और सरकारी आदेशों की अवहेलना है।
ग्रामीण किसान रामलाल, हरिराम और फकीरचंद ने बताया कि खेती के इस महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी से उनकी फसलें खतरे में हैं। “हम घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन खाद मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। जो खाद आती भी है, वह प्राइवेट दुकानदारों के पास पहुँच जाती है, और हमें मजबूरी में महंगे दाम पर खरीदनी पड़ती है।”
यह मामला स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। डीएम के निर्देशों के बावजूद खुलेआम कालाबाज़ारी हो रही है, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ऐसे जमाखोर सचिवों पर क्या कार्रवाई करता है।
किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बरामभरी सहकारी समिति के सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, खाद वितरण में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में अन्नदाताओं का शोषण न हो सके।

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