पटना विश्वविद्यालय, जो कि बिहार राज्य की एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्था है. इन दिनों विवादों के घेरे में है। विश्वविद्यालय के पाँच प्रमुख कॉलेजों में प्राचार्य की नियुक्ति लाटरी प्रणाली से किए जाने पर गहरी आपत्ति जताई जा रही है। इस अनोखी और विवादास्पद प्रक्रिया ने शिक्षा जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। भारतीय जन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे गंमीर कानून अपराध करार दिया है। लखनऊ में संवाददाताओं से बात करते हुए श्री सिंह ने कहा, लाटरी के माध्यम से प्राचार्य जैसे अत्यंत उत्तरदायित्वपूर्ण पद की नियुक्ति करना न केवल शैक्षिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला मज़ाक भी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मनमानी और अव्यवस्थित प्रणाली शिक्षा क्षेत्र को गहरी चोट पहुँचा सकती है। प्राचार्य का पद महज एक प्रशासनिक कुर्सी नहीं, बल्कि संस्थान की दिशा, सोच और चरित्र निर्धारित करने वाला नेतृत्व है। ऐसे में उसकी नियुक्ति को भाग्य के भरोसे छोड़ना अत्यंत निंदनीय है उन्होंने तीखे स्वर में कहा। बृजमोहन सिंह ने इस निर्णय को विकृत प्रयोग बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और चेतावनी दी कि अगर भारत सरकार इस तरह की प्रवृत्तियों पर तत्काल रोक नहीं लगाती, तो यह पूरे देश के शिक्षा तंत्र को भ्रष्ट और मजाक बना देगा। सरकार को चेतावनी देता हूँ दृ देश और देशवासियों के साथ इस तरह का धोखा बंद करो, नहीं त्तो स्वर्ग में भी जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से यह मांग की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराए और लाटरी से की गई सभी नियुक्तियों को अविलंब ब्ल रद्द करे। शैक्षिक समुदाय में भी बढ़ती नाराजगी शिक्षाविदों और छात्रों में भी इस मामले को लेकर भारी असंतोष है। कई लोगों का मानना है कि इससे योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों का मनोबल ल टूटेगा तथा संस्थानों की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अब देखना यह है कि पटना विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा मंत्रालय इस पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या यह प्रक्रिया किसी को त्रुटिपूर्ण व्यवस्था का परिणाम है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश? आने वाले दिनों में यह प्रकरण और तूल पकड़ सकता है।
